गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

हैं कोई जवाब ...............ये कैसी मेहरबानी

हेमंत करकरे, कामते जैसे वीर शहीदों को जिन्होंने मुंबई को बचाने  में अपनी जान तक दे दी, आज कौन जानता हैं?

बस जानते हैं तो आमिर अजमल कसाब को या फिर हमारी सरकार की नाकामी को .

उन शहीदों  के परिवारों को बेशक इस निकम्मी सरकार  ने चाहे कुछ दिया हो या नही लेकिन मेरी एक बात से  आप सबका दिमाग  भी ठीक वैसे ख़राब हो जायेगा जैसे मेरा हो गया हैं.
भारत में काफ़ी लोग ऐसे हैं जो दो वक़्त की रोटी भी बमुश्किल से खा पाते होंगे और ऐसे भी गरीब हैं जिनका इस देश में अपना पेट भरना भी दुश्वार  हो गया हैं.
और ऐसे देश में अगर एक कैदी(आतंकवादी कैदी जिसने देश का इतना बड़ा नुकशान किया हो ) को सुरक्षित रखने के लिये सरकार  इतनी बड़ी रकम खर्च कर दे तो आश्चर्य तो  होगा ही ना .
मेरा ख्याल हैं कि आप समझ गये होंगे जो मै कहना चाहता हूँ.
मेरा इशारा आमिर अजमल कसाब की तरफ हैं
इस  रिपोर्ट को चलिये आप भी पढिये.

मुंबई :- आमिर अजमल कसाब को जिन्दा और स्वस्थ रखने के लिये भारत ने अभी तक उस पर तीस करोड़ रूपए खर्च कर दिए हैं और अभी भी खर्च जारी हैं.
उसे  ठीक तरह से रखने के लिये सरकार ने एक विशेष तरह का सेल बनाया हैं जिसको "अंडा" कहा जा रहा हैं.
इस 21  वर्षीय आतंकवादी को जिन्दा रखने के लिये महारास्ट्र सरकार साडे आठ लाख रुपैये प्रतिदिन खर्च कर रही हैं,
 बीते वर्ष जेजे अस्पताल में उसको रोजाना बारह से सोलह डॉ. चेक किया करते थे. 

गृह मंत्री आर आर पाटिल खुद कह चुके हैं की ये एक बहुत महंगा केस बनता जा रहा हैं परन्तु हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नही हैं.

अब आप ही बताओ कि इसका क्या किया जाये क्योंकि एक और तो मेरे भूखे देशवासी हैं और दूसरी और ये आतंकवादी ?
इसमें किसका दोष हैं और इसके लिये कौन जिम्मेदार हैं. 

1 टिप्पणी:

  1. ये कौन गुस्ताख है भई जो इन "राष्ट्रीय अतिथियों" के लिए इतने ओछे शब्द प्रयोग कर रहा है!

    कुंवर जी,

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